गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले के ग्राम पंचायत पदगवां में 28 अगस्त 2025 गुरुवार को प्रशासन और पंचायत के संयुक्त प्रयास से शासकीय भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराने की कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई ग्राम पंचायत सरपंच, सभी पंचों की सहमति तथा तहसीलदार और पटवारी की मौजूदगी में संपन्न हुई। ग्राम के खसरा नंबर 874/2 की यह भूमि लंबे समय से अवैध कब्जे में थी, जिसे लेकर गांव में लगातार विवाद बना हुआ था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त शासकीय भूमि पर एक स्थानीय निवासी ने वर्षों पूर्व अवैध रूप से कब्जा कर लिया था। समय के साथ उसने वहां निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया। हैरानी की बात यह रही कि शासकीय भूमि होने के बावजूद कब्जाधारी ने न केवल वहां अपनी मौजूदगी बनाए रखी, बल्कि हाल ही में इस भूमि को तीसरे पक्ष को बेच भी दिया। जिस व्यक्ति को यह जमीन बेची गई, उसने भी बिना किसी वैधानिक अनुमति के वहां काम शुरू कर दिया, जिससे गांव में तनाव की स्थिति बन गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्राम पंचायत के सरपंच और पंचों ने इसे उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया। तहसीलदार और पटवारी ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और राजस्व अभिलेखों की जांच की। जांच में स्पष्ट रूप से यह सामने आया कि खसरा नंबर 874/2 की भूमि शासकीय खाते में दर्ज है और इसे न तो किसी निजी व्यक्ति को बेचा जा सकता है और न ही इस पर निजी निर्माण की अनुमति दी जा सकती है। इसके बाद तहसीलदार द्वारा मौके पर निर्माण कार्य तत्काल बंद कराने के निर्देश दिए गए।
हालांकि, प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद मामला और भी संदिग्ध हो गया जब कुछ ही समय बाद उसी भूमि पर फिर से निर्माण कार्य शुरू हो गया। यह स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब तहसीलदार द्वारा कार्य बंद कराया गया था, तो फिर किसके संरक्षण या मिलीभगत से काम दोबारा शुरू हुआ? क्या इसमें ग्राम पंचायत स्तर पर कोई भूमिका है या फिर प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता अथवा मिलीभगत सामने आ रही है?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शासकीय भूमि पर इस तरह खुलेआम कब्जा और निर्माण होता रहा, तो शासन की मंशा और कानून व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और दोबारा शुरू किए गए निर्माण कार्य को तत्काल रोका जाए।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और शासकीय भूमि को स्थायी रूप से अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।




