गौरेला, छत्तीसगढ़। कलेक्टर के निर्देशन एवं जिला शिक्षा अधिकारी के मार्गदर्शन में जिले भर में उल्लास – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत साक्षरता मेले का आयोजन किया गया। इसी क्रम में गौरेला विकासखंड के विभिन्न शासकीय एवं अशासकीय स्कूलों में उल्लास साक्षरता मेले का सफल आयोजन हुआ, जिसमें शिक्षकों, विद्यार्थियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई।


उल्लास साक्षरता मेले का मुख्य उद्देश्य निरक्षर एवं अल्पसाक्षर नागरिकों को पढ़ना-लिखना सिखाने के साथ-साथ उन्हें दैनिक जीवन में साक्षरता के महत्व से अवगत कराना रहा। मेले के दौरान साक्षरता से संबंधित विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनमें पठन-पाठन अभ्यास, लेखन कार्य, अंकज्ञान, डिजिटल साक्षरता, तथा जागरूकता कार्यक्रम शामिल रहे।


गौरेला विकासखंड के विभिन्न विद्यालयों में आयोजित इन मेलों का विकासखंड नोडल अधिकारी आलोक शुक्ला ने विभिन्न स्कूलों के द्वारा लगाए गए स्टालों का अवलोकन किया। जिसके अंतर्गत उन्होंने सारबहरा, धनौली, झगराखाड, पथराटोला, लोहराझोरकी सहित अन्य स्कूलों में जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए शिक्षकों एवं स्वयंसेवकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और साक्षरता अभियान को जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उल्लास कार्यक्रम के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा की रोशनी पहुँचाना शासन की प्राथमिकता है।

साक्षरता मेले में उपस्थित ग्रामीणों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और शिक्षा के प्रति जागरूकता दिखाई। शिक्षकों ने सरल एवं रोचक तरीकों से सीखने-सिखाने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाया, जिससे प्रतिभागियों में विशेष रुचि देखने को मिली।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को साक्षर बनने के लिए प्रेरित किया गया तथा निरंतर अभ्यास के माध्यम से अपने ज्ञान को मजबूत करने का संदेश दिया गया। उल्लास साक्षरता मेले की सफलता ने यह सिद्ध कर दिया कि सामूहिक प्रयासों से समाज को सशक्त और शिक्षित बनाया जा सकता है।

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