मरवाही- 28 दिसंबर 2025: छत्तीसगढ़ के मरवाही क्षेत्र के कटरा, उसाड़ और बरौर के घने जंगलों में जुआ का धंधा खुलेआम फल-फूल रहा है। सूत्रों के अनुसार, यह इलाका मध्य प्रदेश की सीमा से सटा हुआ है, जहां शहडोल, अनुपपुर, राजनगर, अमलाई, जतहरी, मनेंद्रगढ़ और खोगापानी जैसे क्षेत्रों के जुआड़ियों का जमावड़ा लगता है।

दोपहर 3 बजे से देर रात तक, जब तक खिलाड़ी चाहें, जुआ का खेल चलता रहता है। 30 से 40 खिलाड़ियों का अड्डा रोजाना लगता है, जो बेखौफ होकर कारों से आते हैं और फिर बाइक पर सवार होकर जंगल के अंदर ले जाए जाते हैं।जुआ सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि खिलाड़ी इतने निर्भीक क्यों हैं? इसका जवाब है स्थानीय नेताओं और प्रशासन का कथित संरक्षण।

“जुआड़ियों को ऊपरी हस्तक्षेप का पूरा भरोसा है, इसलिए पुलिस का कोई डर नहीं,” एक सूत्र ने कहा। जंगलों की ओट में यह अवैध कारोबार वर्षों से चल रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति ही होती दिखती है। खिलाड़ी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों के हैं, जो सीमा पार आसानी से आ-जा रहे हैं। जुआ के अड्डे पर हजारों-लाखों रुपये की बाजी लगती है, जिसमें ताश, सट्टा और अन्य जुआ खेल प्रमुख हैं।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि जंगलों में अपराधियों का जमावड़ा भी बन रहा है। “रात में जुआ का शोर सुनाई देता है, लेकिन कोई शिकायत करने की हिम्मत नहीं करता,” एक ग्रामीण ने बताया। विशेषज्ञों के अनुसार, सीमावर्ती इलाकों में ऐसे अवैध धंधे पनपते हैं क्योंकि निगरानी कमजोर रहती है।

जिला प्रशासन ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।यह मामला छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश सीमा पर समन्वित कार्रवाई की मांग को तेज कर रहा है। जुआ न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाता है, बल्कि सामाजिक बुराइयों को जन्म देता है। यदि समय रहते सख्ती न हुई, तो यह और फैल सकता है।

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