गौरेला पेंड्रा मरवाही – कार्यक्रम में मुख्य वक्ता श्री तिलक राम नामदेव जी जिला बौद्धिक प्रमुख रहे I उन्होंने अपने उद्बोधन में बताया कि मकर संक्रांति का उत्सव समाज को जोड़ने और संगठित होने का उत्सव हैI जिस प्रकार तिल के एक एक दाने अलग अलग होते है जिससे उनका महत्त्व कम होता हैँ जैसे उनमें गुड़ रूपी मिठास भरने से सब एक जुट होते ही लड्डू निर्माण होता हैँ ,जिससे उसका महत्त्व बढ़ जाता हैँ I ठीक उसी प्रकार समाज में बटे हुए लोग जाति, पंत,भाषा,भूषा, पद्धति, ऊंची नीच के भाव को छोड़कर सबको एक साथ मिलकर समाज को समृद्ध कर निस्वार्थ भाव से भारत माता की सेवा करनी हैI
उद्बोधन में आगे उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 6 उत्सवों में से एक उत्सव मकर संक्रांति का होता है जो कि समाज को संगठित करने की दृष्टि से सभी शाखाओं में मनाया जाता हैI आज के दिन से सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं और सूर्य उत्तरायण में जाता है जिसकी वजह से दिन बड़ा और राते छोटी होती जाती हैंI इस उत्सव को देश के विभिन्न हिस्सों में लोहड़ी, पोंगल, मांघी बिहू,भोंगी पाण्डुगई के नाम से भी मनाया जाता हैI तिलक जी ने संघ के पंच परिवर्तन सामाजिक समरसता,पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य,कुटुंब प्रबोधन एवं स्वदेशी के बारे में विस्तार से जानकारी दी एवं इसे अपने जीवन शैली में अपनाने हेतु सभी से आग्रह किया I
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बाल, तरुण एवं युवा स्वयंसेवक एवं नगर के गणमान्य नागरिक भारत विकास परिषद के सदस्य के सदस्य उपस्थित हुए एवं सभी ने एक दूसरे को तिल का लड्डू खिलाकर मकर संक्रांति की बधाई दी I



